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Psalms 117:1       
 
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योएल Chapter1
 
1 यहोवा का वचन जो पतूएल के पुत्र योएल के पास पहुंचा, वह यह है:
 
2 हे पुरनियो, सुनो, हे देश के सब रहनेवालो, कान लगाकर सुनो! क्या ऐसी बात तुम्हारे दिनोंमें, वा तुम्हारे पुरखाओं के दिनोंमें कभी हुई है?
 
3 अपके लड़केबालोंसे इसका वर्णन करो, और वे अपके लड़केबालोंसे, और फिर उनके लड़केबाले आनेवाली पीढ़ी के लोगोंसे।।
 
4 जो कुछ गाजाम नाम टिड्डी से बचा; उसे अर्बे नाम टिड्डी ने खा लिया। और जो कुछ अर्बे नाम टिड्डी से बचा, उसे थेलेक नाम टिड्डी ने खा लिया, और जो कुछ थेलेक नाम टिड्डी से बचा, उसे हासील नाम टिड्डी ने खा लिया है।
 
5 हे मतवालो, जाग उठो, और रोओ; और हे सब दाखमधु पीलेवालो, नथे दाखमधु के कारण हाथ, हाथ, करो; क्योंकि वह तुम को अब न मिलेगा।।
 
6 देखो, मेरे देश पर एक जाति ने चढ़ाई की है, वह सामर्यी है, और उसके लोग अनगिनित हैं; उसके दांत सिंह के से, और डाढ़ें सिहनी की सी हैं।
 
7 उस ने मेरी दाखलता को उजाड़ दिया, और मेरे अंजीर के वृझ को तोड़ डाला है; उस ने उसकी सब छाल छीलकर उसे गिरा दिया है, और उसकी डालियां छिलने से सफेद हो गई हैं।।
 
8 जैसे युवती अपके पति के लिथे कटि में टाट बान्धे हुए विलाप करती है, वैसे ही तुम भी विलाप करो।
 
9 यहोवा के भवन में न तो अन्नबलि और न अर्ध आता है। उसके टहलुए जो याजक हैं, वे विलाप कर रहे हैं।
 
10 खेती मारी गई, भूमि विलाप करती है; क्योंकि अन्न नाश हो गया, नया दाखमधु सूख गया, तेल भी सूख गया है।।
 
11 हे किसानो, लज्जित हो, हे दाख की बारी के मालियों, गेहूं और जव के लिथे हाथ, हाथ करो; क्योंकि खेती मारी गई है।
 
12 दाखलता सूख गई, और अंजीर का वृझ कुम्हला गया है। अनार, ताड़, सेव, वरन मैदान के सब वृझ सूख गए हैं; और मनुष्योंका हर्ष जाता रहा है।।
 
13 हे याजको, कटि में टाट बान्धकर छाती पीट-पीट के रोओ! हे वेदी के टहलुओ, हाथ, हाथ, करो। हे मेरे परमेश्वर के टहलुओ, आओ, टाट ओढ़े हुए रात बिताओ! क्योंकि तुम्हारे परमेश्वर के भवन में अन्नबलि और अर्ध अब नहीं आते।।
 
14 उपवास का दिन ठहराओ, महासभा का प्रचार करो। पुरनियोंको, वरन देश के सब रहनेवालोंको भी अपके परमेश्वर यहोवा के भवन में इकट्ठे करके उसकी दोहाई दो।।
 
15 उस दिन के कारण हाथ! क्योंकि यहोवा का दिन निकट है। वह सर्वशक्तिमान की ओर से सत्यानाश का दिन होकर आएगा।
 
16 क्या भोजनवस्तुएं हमारे देखते नाश नहीं हुईं? क्या हमारे परमेश्वर के भवन का आनन्द और मगन जाता नहीं रहा?
 
17 बीज ढेलोंके नीचे फुलस गए, भण्डार सूने पके हैं; खत्ते गिर पके हैं, क्योंकि खेती मारी गई।
 
18 पशु कैसे कराहते हैं? फुण्ड के फुण्ड गाय-बैल विकल हैं, क्योंकि उनके लिथे चराई नहीं रही; और फुण्ड के फुण्ड भेड़-बकरियां पाप का फल भोग रही हैं।।
 
19 हे यहोवा, मैं तेरी दोहाई देता हूं, क्योंकि जंगल की चराइयां आग का कौर हो गईं, और मैदान के सब वृझ ज्वाला से जल गए।
 
20 वन-पशु भी तेरे लिथे हांफते हैं, क्योंकि जल के सोते सूख गए, और जंगल की चराइयां आग का कौर हो गईं।।
 
 

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