Bible-Server.org  
 
 
Praise the Lord, all ye nations      
Psalms 117:1       
 
enter keywords   match
 AND find keywords in

Home Page
उत्पत्ति
Genesis
निर्गमन
Exodus
लैव्यवस्था
Leviticus
गिनती
Numbers
व्यवस्थाविवरण
Deuteronomy
यहोशू
Joshua
न्यायियों
Judges
रूत
Ruth
1 शमूएल
1 Samuel
2 शमूएल
2 Samuel
1 राजा
1 Kings
2 राजा 
2 Kings
1 इतिहास
1 Chronicles
2 इतिहास
2 Chronicles
एज्रा
Ezra
नहेमायाह
Nehemiah
एस्तेर
Esther
अय्यूब
Job
भजन संहिता
Psalms
नीतिवचन
Proverbs
सभोपदेशक
Ecclesiastes
श्रेष्ठगीत
Song of Solomon
श्रेष्ठगीत
Isaiah
यिर्मयाह
Jeremiah
विलापगीत
Lamentations
यहेजकेल
Ezekiel
दानिय्येल
Daniel
होशे
Hosea
योएल
Joel
आमोस
Amos
ओबद्दाह
Obadiah
योना
Jonah
मीका
Micah
नहूम
Nahum
हबक्कूक
Habakkuk
सपन्याह
Zephaniah
हाग्गै
Haggai
जकर्याह
Zechariah
मलाकी
Malachi
मत्ती
Matthew
मरकुस
Mark
लूका
Luke
यूहन्ना
John
प्रेरितों के काम
Acts
रोमियो
Romans
1 कुरिन्थियों
1 Corinthians
2 कुरिन्थियों
2 Corinthians
गलातियों
Galatians
इफिसियों
Ephesians
फिलिप्पियों
Philippians
कुलुस्सियों
Colossians
1 थिस्सलुनीकियों
1 Thessalonians
2 थिस्सलुनीकियों
2 Thessalonians
1 तीमुथियुस
1 Timothy
2 तीमुथियुस
2 Timothy
तीतुस
Titus
फिलेमोन
Philemon
इब्रानियों
Hebrews
याकूब
James
1 पतरस
1 Peter
2 पतरस
2 Peter
1 यूहन्ना
1 John
2 यूहन्ना
2 John
3 यूहन्ना
3 John
यहूदा
Jude
प्रकाशित वाक्य
Revelation
 
 

 
 
translate into
उत्पत्ति Chapter1
 
1 आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृय्वी की सृष्टि की।
 
2 और पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी; और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा थाः तथा परमे२वर का आत्मा जल के ऊपर मंडलाता था।
 
3 तब परमेश्वर ने कहा, उजियाला हो: तो उजियाला हो गया।
 
4 और परमेश्वर ने उजियाले को देखा कि अच्छा है; और परमेश्वर ने उजियाले को अन्धिक्कारने से अलग किया।
 
5 और परमेश्वर ने उजियाले को दिन और अन्धिक्कारने को रात कहा। तया सांफ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पहिला दिन हो गया।।
 
6 फिर परमेश्वर ने कहा, जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए।
 
7 तब परमेश्वर ने एक अन्तर करके उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया; और वैसा ही हो गया।
 
8 और परमेश्वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। तया सांफ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार दूसरा दिन हो गया।।
 
9 फिर परमेश्वर ने कहा, आकाश के नीचे का जल एक स्यान में इकट्ठा हो जाए और सूखी भूमि दिखाई दे; और वैसा ही हो गया।
 
10 और परमेश्वर ने सूखी भूमि को पृय्वी कहा; तया जो जल इकट्ठा हुआ उसको उस ने समुद्र कहा: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।
 
11 फिर परमेश्वर ने कहा, पृय्वी से हरी घास, तया बीजवाले छोटे छोटे पेड़, और फलदाई वृझ भी जिनके बीज उन्ही में एक एक की जाति के अनुसार होते हैं पृय्वी पर उगें; और वैसा ही हो गया।
 
12 तो पृय्वी से हरी घास, और छोटे छोटे पेड़ जिन में अपक्की अपक्की जाति के अनुसार बीज होता है, और फलदाई वृझ जिनके बीज एक एक की जाति के अनुसार उन्ही में होते हैं उगे; और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।
 
13 तया सांफ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार तीसरा दिन हो गया।।
 
14 फिर परमेश्वर ने कहा, दिन को रात से अलग करने के लिथे आकाश के अन्तर में ज्योतियां हों; और वे चिन्हों, और नियत समयों, और दिनों, और वर्षोंके कारण हों।
 
15 और वे ज्योतियां आकाश के अन्तर में पृय्वी पर प्रकाश देनेवाली भी ठहरें; और वैसा ही हो गया।
 
16 तब परमेश्वर ने दो बड़ी ज्योतियां बनाईं; उन में से बड़ी ज्योति को दिन पर प्रभुता करने के लिथे, और छोटी ज्योति को रात पर प्रभुता करने के लिथे बनाया: और तारागण को भी बनाया।
 
17 परमेश्वर ने उनको आकाश के अन्तर में इसलिथे रखा कि वे पृय्वी पर प्रकाश दें,
 
18 तया दिन और रात पर प्रभुता करें और उजियाले को अन्धिक्कारने से अलग करें: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।
 
19 तया सांफ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार चौया दिन हो गया।।
 
20 फिर परमेश्वर ने कहा, जल जीवित प्राणियोंसे बहुत ही भर जाए, और पक्की पृय्वी के ऊपर आकाश कें अन्तर में उड़ें।
 
21 इसलिथे परमेश्वर ने जाति जाति के बड़े बड़े जल-जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियोंकी भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहुत ही भर गया और एक एक जाति के उड़नेवाले पझियोंकी भी सृष्टि की : और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।
 
22 और परमेश्वर ने यह कहके उनको आशीष दी, कि फूलो-फलो, और समुद्र के जल में भर जाओ, और पक्की पृय्वी पर बढ़ें।
 
23 तया सांफ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पांचवां दिन हो गया।
 
24 फिर परमेश्वर ने कहा, पृय्वी से एक एक जाति के जीवित प्राणी, अर्यात्‌ घरेलू पशु, और रेंगनेवाले जन्तु, और पृय्वी के वनपशु, जाति जाति के अनुसार उत्पन्न हों; और वैसा ही हो गया।
 
25 सो परमेश्वर ने पृय्वी के जाति जाति के वनपशुओं को, और जाति जाति के घरेलू पशुओं को, और जाति जाति के भूमि पर सब रेंगनेवाले जन्तुओं को बनाया : और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।
 
26 फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपके स्वरूप के अनुसार अपक्की समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पझियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृय्वी पर, और सब रेंगनेवाले जन्तुओं पर जो पृय्वी पर रेंगते हैं, अधिक्कारने रखें।
 
27 तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपके स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपके ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी करके उस ने मनुष्योंकी सृष्टि की।
 
28 और परमेश्वर ने उनको आशीष दी : और उन से कहा, फूलो-फलो, और पृय्वी में भर जाओ, और उसको अपके वश में कर लो; और समुद्र की मछलियों, तया आकाश के पझियों, और पृय्वी पर रेंगनेवाले सब जन्तुओ पर अधिक्कारने रखो।
 
29 फिर परमेश्वर ने उन से कहा, सुनो, जितने बीजवाले छोटे छोटे पेड़ सारी पृय्वी के ऊपर हैं और जितने वृझोंमें बीजवाले फल होते हैं, वे सब मैं ने तुम को दिए हैं; वे तुम्हारे भोजन के लिथे हैं :
 
30 और जितने पृय्वी के पशु, और आकाश के पक्की, और पृय्वी पर रेंगनेवाले जन्तु हैं, जिन में जीवन के प्राण हैं, उन सब के खाने के लिथे मैं ने सब हरे हरे छोटे पेड़ दिए हैं; और वैसा ही हो गया।
 
31 तब परमेश्वर ने जो कुछ बनाया या, सब को देखा, तो क्या देखा, कि वह बहुत ही अच्छा है। तया सांफ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार छठवां दिन हो गया।।
 
 

  | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 | 18 | 19 | 20 | 21 | 22 | 23 | 24 | 25 | 26 | 27 | 28 | 29 | 30 | 31 | 32 | 33 | 34 | 35 | 36 | 37 | 38 | 39 | 40 | 41 | 42 | 43 | 44 | 45 | 46 | 47 | 48 | 49 | 50 | [ Next ]