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Psalms 117:1       
 
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निर्गमन Chapter1
 
1 इस्राएल के पुत्रोंके नाम, जो अपके अपके घराने को लेकर याकूब के साय मिस्र देश में आए, थे हैं:
 
2 अर्यात्‌ रूबेन, शिमोन, लेवी, यहूदा,
 
3 इस्साकार, जबूलून, बिन्यामीन,
 
4 दान, नप्ताली, गाद और आशेर।
 
5 और यूसुफ तो मिस्र में पहिले ही आ चुका या। याकूब के निज वंश में जो उत्पन्न हुए वे सब सत्तर प्राणी थे।
 
6 और यूसुफ, और उसके सब भाई , और उस पीढ़ी के सब लोग मर मिटे।
 
7 और इस्राएल की सन्तान फूलने फलने लगी; और वे अत्यन्त सामर्यी बनते चले गए; और इतना बढ़ गए कि कुल देश उन से भर गया।।
 
8 मिस्र में एक नया राजा गद्दी पर बैठा जो यूसुफ को नहीं जानता या।
 
9 और उस ने अपक्की प्रजा से कहा, देखो, इस्राएली हम से गिनती और सामर्य्य में अधिक बढ़ गए हैं।
 
10 इसलिथे आओ, हम उनके साय बुद्धिमानी से बर्ताव करें, कहीं ऐसा न हो कि जब वे बहुत बढ़ जाएं, और यदि संग्राम का समय आ पके, तो हमारे बैरियोंसे मिलकर हम से लड़ें और इस देश से निकल जाएं।
 
11 इसलिथे उन्होंने उन पर बेगारी करानेवालोंको नियुक्त किया कि वे उन पर भार डाल डालकर उनको दु:ख दिया करें; तब उन्होंने फिरौन के लिथे पितोम और रामसेस नाम भण्डारवाले नगरोंको बनाया।
 
12 पर ज्योंज्योंवे उनको दु:ख देते गए त्योंत्योंवे बढ़ते और फैलते चले गए; इसलिथे वे इस्राएलियोंसे अत्यन्त डर गए।
 
13 तौभी मिस्रियोंने इस्राएलियोंसे कठोरता के साय सेवकाई करवाई।
 
14 और उनके जीवन को गारे, ईंट और खेती के भांति भांति के काम की कठिन सेवा से दु:खी कर डाला; जिस किसी काम में वे उन से सेवा करवाते थे उस में वे कठोरता का व्यवहार करते थे।
 
15 शिप्रा और पूआ नाम दो इब्री धाइयोंको मिस्र के राजा ने आज्ञा दी,
 
16 कि जब तुम इब्री स्त्रियोंको बच्चा उत्पन्न होने के समय जन्मने के पत्यरोंपर बैठी देखो, तब यदि बेटा हो, तो उसे मार डालना; और बेटी हो, तो जीवित रहने देना।
 
17 परन्तु वे धाइयां परमेश्वर का भय मानती यीं, इसलिथे मिस्र के राजा की आज्ञा न मानकर लड़कोंको भी जीवित छोड़ देती यीं।
 
18 तब मिस्र के राजा ने उनको बुलवाकर पूछा, तुम जो लड़कोंको जीवित छोड़ देती हो, तो ऐसा क्योंकरती हो?
 
19 धाइयोंने फिरौन को उतर दिया, कि इब्री स्त्रियोंमिस्री स्त्रियोंके समान नहीं हैं; वे ऐसी फुर्तीली हैं कि धाइयोंके पहुंचने से पहिले ही उनको बच्चा उत्पन्न हो जाता है।
 
20 इसलिथे परमेश्वर ने धाइयोंके साय भलाई की; और वे लोग बढ़कर बहुत सामर्यी हो गए।
 
21 और धाइयां इसलिथे कि वे परमेश्वर का भय मानती यीं उस ने उनके घर बसाए।
 
22 तब फिरौन ने अपक्की सारी प्रजा के लोगोंको आज्ञा दी, कि इब्रियोंके जितने बेटे उत्पन्न होंउन सभोंको तुम नील नदी में डाल देना, और सब बेटियोंको जीवित रख छोड़ना।।
 
 

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